प्यार के रंग में
जिंदगी में शांतता का प्यार ही आधार है
प्यार बिन संसार में हर भाव ही निस्सार है
प्यार के रंग में जो डूबा भूलकर शिकवे सभी
फूल है उस चमन का जिसमें सदा बहार है
अभिव्यक्ति में यदि हो समाहित सभ्यता शालीनता,
स्वच्छंदता से बोलने का सभी को अधिकार है
रोक पाया जो न आंसू देखकर आँखें सजल
जिंदगी का हर निमिष उसके लिए उपहार है
विद्वता अधिकांशतया दर्प को "श्री" जन्म देती
पनपने से पहले कुचलना विद्वता का सार है
श्रीप्रकाश शुक्ल

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