जिजीविषा बदनाम होगयी
संघर्षों के बीच झूलता रहा, जिन्दगी का यायावर
जब भी चाहा मुक्त तैरना, खीच ले गयी नई भंवर
जीवन नौका खेना दुष्कर, चर्चा ऐसी आम होगयी
लँगड़ाते अनुबंध निभाते, जिंदगानी एक काम होगयी
जिजीविषा बदनाम होगयी
प्रेयसि पार्श्व बैठकर देखूं, जल प्रपात की धाराएं
प्रतिबिंबित हो जहाँ रश्मियाँ, सतरंगी आभा फैलाएं
खग बृंदों की कलरव ध्वनि, जीवन में गुमनाम होगयी
उलझे रहे प्रपंचो में,तब तक जीवन की शाम होगयी
जीवन है पावन यज्ञ, सत्य की खोज अगर करनी है
आहुति देनी होगी खुद की, ह्रदय शांति यदि भरनी है
कल कलुष मिटाने की चाहत, मन की चिंता धाम होगयी
दुरुह द्वन्द, दुविधा निबटाते, जीवन धार तमाम होगयी
जिजीविषा बदनाम होगयी
आसक्ति, प्रलोभन, दुर्विचार, झंझावात रहे जीवन के
अवगाहन कर मानव ने, दूभर कष्ट सहे तन मन के
जब समझा इनके कारण ही, जीवन की गति जाम होगयी
आँधियां रुकीं , अहुटे बादल, और धुली सी घाम होगयी
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